बबीना ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के नियमों का उल्लंघन: श्रमांश की तुलना में सामग्री पर अधिक खर्च

Dec 21, 2024 - 13:15
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बबीना ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के नियमों का उल्लंघन: श्रमांश की तुलना में सामग्री पर अधिक खर्च

बबीना ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के नियमों का उल्लंघन: श्रमांश की तुलना में सामग्री पर अधिक खर्च

झांसी, उत्तर प्रदेश: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए श्रमांश और सामग्री के व्यय का संतुलन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। योजना के अनुसार, कुल व्यय का 60% श्रमांश (मजदूरी) और 40% सामग्री पर खर्च किया जाना चाहिए। हालांकि, झांसी के बबीना ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों में इस नियम का पालन न करने के मामले सामने आए हैं।

मनरेगा के नियमों का उल्लंघन

मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके तहत श्रमांश पर 60% और सामग्री पर 40% धनराशि खर्च करने का प्रावधान किया गया है। लेकिन बबीना ब्लॉक की कई पंचायतों में इस नियम की अनदेखी की गई है।

विशेष रूप से बलौरा ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण कार्य को नियमों के उल्लंघन के कारण रोक दिया गया। इसी प्रकार, बबीना ब्लॉक की अन्य 16 ग्राम पंचायतों ने भी सामग्री पर अधिक खर्च कर मनरेगा के मूल उद्देश्य को कमजोर किया है।

संतुलन की कमी से अधूरे कार्य और समस्याएं

बलौरा ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण कार्य रुकने से लगभग 5,000 की आबादी प्रभावित हुई है। अन्य पंचायतों में भी इसी प्रकार की समस्याएं देखी गई हैं। सामग्री पर अधिक खर्च होने से श्रमांश के लिए बजट कम हो गया, जिससे मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

मनरेगा अधिकारियों का बयान

इस मुद्दे पर मनरेगा के उपायुक्त शिखर श्रीवास्तव ने कहा,
"मनरेगा के तहत 60% श्रमांश और 40% सामग्री पर खर्च का प्रावधान है। बबीना ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों में इस नियम का पालन न करने की शिकायतें मिली हैं। जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"

वास्तविक खर्च की स्थिति

बबीना ब्लॉक की पंचायतों में व्यय की स्थिति इस प्रकार है:

निष्कर्ष और आवश्यक कदम

बबीना ब्लॉक में मनरेगा के नियमों का उल्लंघन प्रशासनिक निगरानी की कमी और वित्तीय प्रबंधन में खामियों को उजागर करता है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही, मनरेगा के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करने के लिए पंचायत स्तर पर निगरानी को और सख्त किया जाना चाहिए।

सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों को रोजगार सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए इस प्रकार की अनियमितताओं पर कड़ा संज्ञान ले।

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