झांसी में बुलडोजर की मार: गरीब सब्जी विक्रेताओं की आजीविका पर संकट
Bulldozer action in Jhansi's Sipri Bazaar destroyed vegetable vendors' livelihoods, leaving many, including a pregnant woman, in distress. Over 40 stalls were demolished without alternative arrangements, sparking outrage among the poor. Read the full story of their struggle
झांसी में बुलडोजर की मार: गरीब सब्जी विक्रेताओं की आजीविका पर संकट
झांसी के सीपरी बाजार में गुरुवार शाम नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई ने गरीब सब्जी विक्रेताओं की मेहनत और आजीविका पर गहरी चोट की है। सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले 40 से अधिक दुकानदारों की दुकानें तहस-नहस कर दी गईं। लाखों रुपये की सब्जियां बर्बाद कर दी गईं, जिससे गरीब परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक समस्या खड़ी हो गई।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए हुए उनकी दुकानों पर कार्रवाई करना अन्याय है। प्रशासन द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद उन्हें हटाने से पहले दूसरी जगह उपलब्ध नहीं कराई गई।
गर्भवती महिला का दर्द: "हम कहां जाएं?"
मसीहागंज की राधिका कुशवाहा, जो आठ महीने की गर्भवती हैं, ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा,
"मैं सुबह 6 बजे घर से निकलती हूं और रात 10 बजे घर लौटती हूं। रोज आढ़तियों से उधार सब्जी लेकर आती हूं और उसे बेचकर पैसे चुकाती हूं। अगले महीने मेरी डिलीवरी है, जिसके लिए पैसे जोड़ रही थी, लेकिन बुलडोजर ने सब बर्बाद कर दिया। अब आढ़तियों को पैसे कहां से दूंगी? अगर सब्जी नहीं बेची, तो मेरे बच्चे भूखे मर जाएंगे।"
राधिका का कहना है कि नगर निगम हर महीने उनसे रसीद काटता है, लेकिन स्थायी जगह नहीं दे रहा।
20 साल से सब्जी बेच रहीं महिलाएं भी हुईं बेघर
बरुआसागर की विद्या देवी ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से सड़क किनारे सब्जी बेच रही हैं। उन्होंने कहा,
"जब हमने प्रशासन से पूछा कि हमें कहां जाएं, तो जवाब मिला कि डंडे से सही कर देंगे। हम गरीब लोग हैं। हमारी कोई खेतीबाड़ी नहीं है। सब्जी बेचकर ही परिवार पालते हैं। लेकिन नगर निगम ने हमारी सब्जियां रौंद दीं। हमें उठाने तक का समय नहीं दिया गया।"
आजीविका पर संकट: "गरीबों को सताया जा रहा है"
झांसी के इन गरीब सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बुलडोजर की कार्रवाई ने उनके जीवन को अंधकारमय कर दिया है। एक ओर वे रोजाना आढ़तियों से उधार सब्जी लेकर बेचते थे और अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। अब उनकी सब्जियां कुचल दी गई हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की आय खत्म हो गई।
नगर निगम का बयान: "कार्यवाही की जानकारी नहीं थी"
इस घटना पर नगर आयुक्त का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। उन्होंने इसे अतिक्रमण प्रभारी की मनमानी करार दिया। बावजूद इसके, अतिक्रमण प्रभारी बृजेश वर्मा के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रश्नचिह्न प्रशासन पर
यह घटना झांसी के गरीब तबके के लिए केवल आर्थिक संकट नहीं है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का एक और उदाहरण है। गरीब सब्जी विक्रेता केवल अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे थे। नगर निगम की यह कार्रवाई उनके संघर्ष को और कठिन बना रही है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन से सवाल उठता है कि क्या ऐसे गरीबों को न्याय मिलेगा? क्या उन्हें एक स्थायी स्थान देकर उनकी आजीविका को सुरक्षित किया जाएगा? जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, झांसी के इन गरीब परिवारों का दर्द उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को और कठिन बनाता रहेगा।
What's Your Reaction?