पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: 115 की स्पीड पर ट्रायल, 130 की रफ्तार का परीक्षण आज
Experience the first Vande Bharat Sleeper Express trial between Mahoba and Khajuraho, featuring European technology, modern safety measures, and speeds up to 130 km/h. Discover India’s semi-high-speed innovation with advanced facilities and cutting-edge design.
पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: 115 की स्पीड पर ट्रायल, 130 की रफ्तार का परीक्षण आज
देश की पहली सेमी हाईस्पीड स्वदेशी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का ट्रायल रविवार को महोबा से खजुराहो के बीच सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। 63 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इसे 115 किमी/घंटा की गति से चलाया गया। आज इसे 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चलाने का परीक्षण किया जाएगा।
यूरोपियन तकनीक पर आधारित निर्माण
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को यूरोपियन तकनीक के अनुसार तैयार किया गया है। इसके ट्रायल के दौरान हाइड्रोलिक स्प्रिंग्स का प्रेशर कम करके इसे 60 से 80 किमी/घंटा की गति पर चलाया गया। ऐसा परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि भविष्य में यदि एयर प्रेशर कम हो जाए तो भी ट्रेन सुचारू रूप से संचालित हो सके।
63 किमी लंबे विद्युतीकृत ट्रैक पर परीक्षण
झांसी रेल मंडल के महोबा-खजुराहो खंड का विद्युतीकरण होने के साथ-साथ यहां का ट्रैक हाईस्पीड के अनुकूल है। इसीलिए यहां पहली वंदे भारत मेट्रो के बाद स्लीपर एक्सप्रेस का ट्रायल किया जा रहा है। ट्रायल रन को देखने के लिए रविवार को बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए।
ट्रायल के दौरान 'पंचर' टेस्ट
ट्रायल के दौरान हाइड्रोलिक स्प्रिंग्स को लूज कर ट्रेन को "पंचर" किया गया। इससे ट्रेन एक ओर झुक गई, जिसे देखकर कुछ लोग चिंतित हो गए। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह परीक्षण भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। इस दौरान ट्रेन में उतना ही वजन रखा गया, जितना यात्रियों के बैठने पर होगा।
आरडीएसओ की देखरेख में ट्रायल
ट्रेन के ट्रायल की पूरी प्रक्रिया रेलवे की रिसर्च, डिजाइन और स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की निगरानी में हुई। आरडीएसओ के अधिकारियों ने हाइड्रोलिक स्प्रिंग, ट्रैक डिजाइन और सुरक्षा संबंधी अन्य पहलुओं पर गहन जांच की।
प्रत्येक कोच में 72 बर्थ और आधुनिक सुविधाएं
ट्रेन में कुल 14 कोच हैं, जिनमें से 12 यात्री कोच और 2 पावर कार हैं। प्रत्येक यात्री कोच में 72 बर्थ हैं। ट्रेन में हर बर्थ पर एक स्टॉप बटन दिया गया है, जिसे दबाकर यात्री सीधे लोको पायलट से सहायता मांग सकते हैं। पावर कार कोचों में एसी और लाइट के लिए बिजली की सप्लाई होगी।
रेलवे बोर्ड की योजना के तहत ट्रायल
झांसी रेल मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह ट्रायल रेलवे बोर्ड की योजना का हिस्सा है। तकनीकी और सुरक्षा के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसे आरडीएसओ के अफसरों की देखरेख में चलाया जा रहा है।
वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस देश की रेल सेवा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की एक और महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
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